Sunday, July 19, 2009
"छोटे कद काठी की; सामान्य शक्ल सूरत वाली लड़की इस कद्र बेकरार बना सकती है इसका मुझे ख़ुद एहसास नही था.लेकिन जो होना था सो हो गया, वह चुपके से आयी और दिल की गहराइयों में उतरती चली गयी.उसकी जिस एक खूबी से मैं सबसे ज्यादा आकर्षित हुआ वह उसकी कम बोलने की आदत थी.बहुत पुश करने पर शायद संक्षेप में प्रतिक्रिया व्यक्त करके फ़िर वही स्थाई खामोशी अपने चेहरे पर ओढ़ लेती थी.ऐसा वक्तित्व बहुत कम देखने को मिलता है.ऐसा नही की उसके पास बोलने लायक ज्ञान या शब्दों की कमी हो लेकिन वह एम्.ऐ. पास लड़की तो बहुत ही कम बोलती है.मुझे नही पता की मेरे उसके साथ प्यार का भविष्य क्या होगा, मैं उसे हासिल कर पाऊंगा या नही लेकिन इतना तय है की उसे पाने वाला शख्स बहुत ही खुशकिस्मत होता.
Monday, March 17, 2008
हर आदमी परेशान है
जिधर देखो उधर दौड़ते हुए इंसानी जिस्म दिख जायेंगे। दो मिनट की फुरसत नही है की दूसरो का हालचाल ले सके। पड़ोस में कोई मर गया है लोगबाग़ भीड़ की शक्ल में जमा है। मोहन बाबू बार बार बेचैनी से कलाई पर बंधी घड़ी को देख रहे है उफ़ लगता है पार्टी शुरू हो गयी होगी। शुक्ला जी को भी मरने के लिए आज का दिन ही मिला था।
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